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Friday, 4 October 2013

मासिक राशिफल माह अक्टूबर 2013 एवं मास के व्रत, पर्व एवम त्यौहार


मासिक राशिफल माह अक्टूबर 2013 एवं मास के व्रत, पर्व एवम त्यौहार
पं. उमेश  चन्द्र  पंत, पवित्र ज्योतिष केंद्र, वेब साइट : www.pavitrajyotish.com
 र्इ मेल : pavitrajyotish@gmail.com फोन : +91-9582192381, +91-11-26496501

अक्टूबर मास के व्रत, पर्व एवम त्यौहार :-
एकादशी व्रत: 1 अक्टूबर, प्रदोष व्रत: 2 अक्टूबरमास शिवरात्री व्रत: 3 अक्टूबर, श्राद्ध अमावस्या (पितृ विर्सजन): 4 अक्टूबर, स्नानादि अमावस्या, शारदीय नवरात्र प्रारम्भ, क्लश स्थापन: 5 अक्टूबर, गणेश चतुर्थी व्रत: 8 अक्टूबर, ललिता पंचमी व्रत: 9 अक्टूबर, सरस्वती आवाहन महानिशा पूजा: 11 अक्टूबर, दुर्गाष्टमी, महाष्टमी, सरस्वती पूजनम: 12 अक्टूबर, महानवमी शस्त्रपूजनम, दशहरा: 13 अक्टूबर, पापांकुशा एकादशी व्रत: 15 अक्टूबर, प्रदौष व्रत: 16 अक्टूबर, सौर कार्तिक प्रारम्भ: 17 अक्टूबर, शरद पूर्णिमा, बाल्मीकि जयंती:18 अक्टूबर, गणेश चतुर्थी, करवा चौथ व्रत: 22 अक्टूबर, अहोर्इ अष्टमी: 26 अक्टूबर, राधाष्टमी: 27 अक्टूबर, रम्भा एकादशी व्रत: 30 अक्टूबर, गोवत्स द्वादशी: 31 अक्टूबर।

मेष (Aries) चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ ।
इस माह सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। आय की अपेक्षा व्यय की अधिकता रहेगी। कार्यो में उलझन आयेंगी। वाहन एवं रोजगार प्राप्ति के अवसर आयेंगे। विदेश यात्रा का योग बनेगा। व्यावसायिक प्रगति होगी। विधार्थियों को प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता मिलेगी। जीवनसाथी से वांछित सहयोग मिलेगा। इच्छित पद प्राप्ति सम्भव। उत्तरार्द्ध में समस्याओं में वृद्धि होगी। जीवन साथी के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहेंगे। मन में उच्चाटन का भाव रहेगा। स्वास्थ्य सामान्यत: ठीक रहेगा। पाचन तंत्र या निद्रा विकार सम्भव। अक्टूबर मास की 5, 7, 23 एवम 25 तारीखें नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप गणेश जी की अराधना करें एवं “ऊँ गं गणपतये नम:” का जप करें।

वृषभ (Taurus) उ, , , , बा, बी, बे, बो ।
इस माह मान सम्मान में वृद्धि होगी। पारिवारिक परेशानियों में वृद्धि होगी। स्त्री वर्ग से वांछित सहयोग मिलेगा। मित्रवर्ग से भी अपेक्षित मदद प्राप्त होगी। राजकीय कार्यो में लाभ होगा। भूमि संबंधी क्रय विक्रय में सावधानी रखें। व्यक्तिगत दृष्टि से यह माह श्रेष्ठ फलदायक सिद्ध होगा। कार्य प्रबन्धन सर्वश्रेष्ठ स्तर का रहेगा। आय सामान्यत: औसत रहेगी। नवीन व्यावसायिक संधि सम्भव। व्यावसायिक संबंधों का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। माता के स्वास्थ्य के कारण चिंतित  रहेंगे। यात्राए कष्टप्रद रहेंगी। स्वास्थ्य सामान्यत: ठीक रहेगा। शीत प्रकृति के रोग होना सम्भव। अक्टूबर मास की 1, 3, 13, 20 एवम 21 तारीखें नेष्ट फलदायक है, अत: सावधान रहना चाहिए। आप विष्णु भगवान की अराधना करें एवं “'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।

मिथुन (Gemini), की, कू, , , , के, को, हा ।
इस माह अध्ययन-अध्यापन में रूचि बढ़ेगी। व्यापार में वृद्धि होगी। रोजगार के अवसर सृजित होंगे। राजकीय कार्यो में लाभ होगा। भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। संतान के कारण चिंतित रहेंगे। आमदनी में वृद्धि से धन संग्रह में वृद्धि होगी। भाग दौड़ की अधिकता रहेगी। इस माह कर्इ बार आपके कार्य क्षमता की परीक्षा होगी। उत्तरार्द्ध में तनाव की स्तिथिया भी आयेंगी। उदर विकार, शुगर आदि विकार सम्भव। कार्य सम्पन्नता की गति धीमी रहेगी। अक्टूबर माह की 4, 5, 13, 15 एवम 23 तारीखे नेष्ट फलदायक है अत: सावधान रहना चाहिए। आप नित्य शिवजी की अराधना करें एवम '”ऊँ नम: शिवाय” का जप करें।

कर्क (Cancer) ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो ।
इस माह व्यापारिक कार्यो में वांछित लाभ होगा। राजकीय कार्यो में लाभ होगा। उच्चाधिकारियों की अनुकम्पा प्राप्त होगी। पारिवारिक सहयोग व सान्निध्य में वृद्धि होगी। आर्थिक दृष्टि से दबाव के बावजूद आप लक्ष्य से विचलित नहीं होगे। संतान से सुखद समाचार मिलेगा। इस माह आप कार्य स्थान पर कुछ खास कर दिखायेंगे। लेखन संबंधी कार्यो में रूचि बढ़ेगी। नेत्र रोग, उदर रोग, जोड़ो के दर्द से कष्ट होगा। माता-पिता की तरफ से चिंता बनी रहेगी। जीवनसाथी से सम्बंध मधुर रहेंगे। अक्टूबर मास की 1, 3, 15, 17 एवम 24 तारीखे नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप नित्य शनि की अराधना करें एवम नित्य ''ऊँ शं शन्नेश्चराय नम:" का जप करें।

सिंह (Leo) मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे ।
इस माह धन, मान-सम्मान एवं पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। धार्मिक कार्य का आयोजन होगा। यात्राएं सम्भव। किसी पुराने मामले में पुन: उलझने की स्तिथिया उत्पन्न होंगी। सामाजिक दायित्व की वृद्धि होगी। सामाजिक मान-सम्मान भी बढ़ेगा। शत्रुओं द्वारा अनावश्यक षडयंत्र रचा जायेगा। नवीन कार्य योजनायें बनेंगी। कुल मिलाकर यह माह अनुकूल जायेगा। आय अच्छी होगी। व्यय पर नियंत्रण रहेगा। संतान पक्ष् से खुशी होगी। उच्च कोटि के व्यावसायिक निर्णय आपको आगे चलकर फायदा करेंगे। स्वभाव में तेजी रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। अक्टूबर मास की 15, 25, 26 एवम 29 तारीखे नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप सूर्य की अराधना करे एवं “ऊँ घृणि: सूर्याय नम:” का जाप करें।

कन्या (Virgo) टो, पा, पी,पू, , , , पे, पो।
इस माह व्यापारिक गतिविधियों में कमियाँ आयेंगी। व्यापार हानि सम्भव। भूमि, भवन या सम्पत्ति का लाभ मिलेगा। शत्रु हानि पहुँचाने का प्रयास करेंगे, किंतु सफल नही होंगे। कार्य व्यवसाय में किसी षडयंत्र के प्रति सजग रहे। प्रथमार्ध में जहां गतिरोध की अधिकता रहेगी वहीं उत्तरार्द्ध में कुछ शांति होगीं समाज में यश प्रतिष्ठा बढ़ेगी। नये लोग आपसे जुड़ेंगे। उत्तरार्द्ध में आप व्यावसायिक कार्यो में तेज गति से कार्य करेंगे। स्वास्थ्य औसत रहेगा। अक्टूबर मास की 3, 11, 13, 21 एवम 23 तारीखें नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप गणेश जी की अराधना करें एवं “ऊँ गं गणपतये नम:” का जप करें।

तुला (Libra) रा, री, रू, रे, ता, ती, तू, ते ।
इस माह मानसिक अशांति रहेगी। शत्रुओ की वृद्धि एवं शारीरिक कष्ट रहेगे। परिवार में प्रोपर्टी संबंधी विवाद उभरेगा। साझेदारी के कार्यो में विवाद एवम हानि की स्तिथिया आयेंगी। भूमि-भवन का लाभ सम्भव। नवीन योजनाओं का क्रियान्वन होगा। राजनीति से लाभ होगा। राजकीय कार्यो में सफलता मिलगी। उत्तरार्द्ध में रुके हुए कार्य भी बनने लगेंगे। तीर्थ यात्राऐ होगी। कुछ नया कार्य भी प्रारम्भ करेंगे। मांसात में आजीविका क्षेत्र में कष्ट आयेंगे। स्वास्थ्य सामान्यत: ठीक रहेगा। अक्टूबर मास की 1, 9, 19, 20 एवम 27 तारीखे नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप नित्य शनि की अराधना करें एवम नित्य ''ऊँ शं शन्नेश्चराय नम:" का जप करें।

वृश्चिक (Scorpio) तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू ।
इस माह पारिवारिक जनो से विशेष सहयोग की प्राप्ति होगी। व्यापारिक लाभ में कमी आयेगी। उच्चाधिकारियों से टकराव की स्थितिया आयेंगी। कानूनी उलझन में पड़ने का भय। सामाजिक कार्यो में भागीदारी बढ़ेगी। भवन प्राप्ति सम्भव। नजदीकी लोगो के व्यवहार से निराशा होगी। उत्तरार्द्ध में परिस्तिथिया आपके पक्ष में होंगी। स्वास्थ्य की दृष्टी से प्रथमार्ध की अपेक्षा उत्तरार्द्ध में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कते आयेंगी। शीत प्रकृति के रोग, वात रोग परेशान करेंगे। स्वास्थ्य सामान्यत: ठीक रहेगा। अक्टूबर मास की 5, 7, 16, 24 एवम 26 तारीखे नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप नित्य शनि की अराधना करें एवम नित्य ''ऊँ शं शन्नेश्चराय नम:" का जप करें।

धनु ( Sagittarius) ये, यो, , भी, भू, धा, फा, ढा, भे ।
इस माह आत्म विश्वास में वृद्धि के साथ-साथ कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। संतान पक्ष से सुखद समाचार मिलेगा। भूमि-भवन संबंधी विवाद  सम्भव। वाहन चलाने में सावधानी रखें। काम-काज के संबंध में खूब भागदौड़ होगी। धन प्राप्ति में वृद्धि होंगी। भागीदारी कार्यो से भी लाभ होगा। उत्तरार्द्ध थोड़ा कष्टप्रद रहेगा। व्यक्तिगत रिश्तो में आपको सावधानी रखनी होगी। स्वास्थ्य सामान्यत: ठीक रहेगा। उत्तरार्द्ध में मानसिक परेशानियाँ होंगी। अक्टूबर मास की 10, 17, 19 एवम 28 तारीखें नेष्ट फलदायक है, अत: सावधान रहना चाहिए। आप विष्णु भगवान की अराधना करें एवं ''ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।

मकर (Capricorn) भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, , गी ।
इस माह में मित्रवर्ग का वांछित सहयोग मिलेगा। जीवन साथी व संतान का सुख मिलेगा। राजकीय कार्यो में सफलता मिलेगी। घरेलू कारणों से मन खिन्न रहेगा। किसी न्यायालयीय प्रकरण से मुक्ति मिलेगी। छोटी-मोटी कर्इ समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। श्रमानुरुप मन-माफिक परिणाम न आने से मन में खिन्नता रहेंगी। कार्य क्षेत्र में परिवर्तन भी संभव। परिस्थितियाँ माकूल होने में समय लगेगा। किसी नवीन कार्य योजना हेतु ऋण प्रबंधन की भी आवश्यकता पड़ेगी। रक्तचाप, उदर विकार एवं शीत प्रकृति के रोगो का सामना करना पड़ेगा। अक्टूबर माह की 7, 16, 24, 26 एवम 27 तारीखे नेष्ट फलदायक है अत: सावधान रहना चाहिए। आप नित्य शिवजी की अराधना करें एवम ''ऊँ नम: शिवाय का जप करें।

कुंभ ( Aquarius) गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा ।
इस माह व्यर्थ किसी विवाद में पड़ सकते हैं। धार्मिक रुझान बढ़ेगा। रुके हुए धन की प्राप्ति होगी। उत्तरार्द्ध में विशिष्ट लाभ की स्तिथिया बनेगी । पठन कार्यो मे रूचि बढेगी । व्यावसायिक गतिविधियों मे वृद्धि होगी। कार्य क्षेत्र में लाभ की मात्रा बढ़ेगी। मित्र वर्ग से लाभ होगा। जीवन साथी का सहयोग व सन्निध्य मिलेगा। यह माह व्यावसायिक उपलब्धियों का रहेगा। वरिष्ठ जनो से श्रेष्ठ मार्गदर्शन मिलेगा। इस माह व्यावसायिक दृष्टि से बड़े निर्णय की तरफ बढ़ेगे। विशेषज्ञों की राय पर चलेंगे। स्वास्थ्य सामान्यत: ठीक रहेगा । त्वचा संबंधी रोग, एलर्जी परेशानी का कारण रहेगी। अक्टूबर मास की 1, 3, 11, 13 एवम 21 तारीखें नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप गणेश जी की अराधना करें एवं ''ऊँ गं गणपतये नम: का जप करें।

मीन (Pisces) दी, दू, , , दे, दो, चा, ची ।
इस माह व्यापार में उन्नति, प्रियजनो से मतभेद एवम यात्रा में कष्ट होगा। नवीन रोजगार प्राप्ति संभव। विदेश यात्रा का योग। प्रथमार्ध जहाँ कष्टप्रद रहेगा वहीं उत्तरार्द्ध में अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। कोर्इ करीबी दोस्त धोखा दे सकते हैं। मन में निराशा का भाव रहेगा। किसी विशेष कार्य हेतु प्रयासरत रहेंगे, जिसमें सफलता भी मिलेगी। लेन देन के मामलो में कोर्इ विवाद भी उभरकर आ सकता है। सामाजिक कार्यो में बाधायें आयेंगी। यात्राओं की अधिकता रहेगी। मासांत में कार्य सफलता की गति अत्यंत धीमी रहेगी। स्वास्थ्य नरम रहेगा। शीत प्रकृति के रोग सम्भव। अक्टूबर माह की 6, 8, 18, 23 एवम 24 तारीखे नेष्ट फलदायक हैं, अत: सावधान रहना चाहिए। आप नित्य शनि की अराधना करें एवम नित्य ''ऊँ शं शन्नेश्चराय नम:" का जप करें। शुभप्रद परिणाम प्राप्त होंगे।

क्या आप भी जानना चाहते हैं अपना व्यक्तिगत भविष्यफल? तो देर ना करें, आज ही पंडित जी से सम्पर्क कर मेल द्वारा अथवा फ़ोन द्वारा अपना विस्तृत भविष्यफल प्राप्त करें।


उमेश चन्द्र पन्त ज्योतिषाचार्य,
Celebrity Astrologer: astroyogi, ganeshaspeaks
Website: 
www.pavitrajyotish.com
Phone: +91-11-26496501
       +91-11-9582192381



Friday, 20 September 2013

THE NINE PLANETS – NAVGRAHA



Celebrity astrologer Pt Umesh Chandra Pant explains the Navagraha in detail!


Characteristics and other basic information of Navagraha: Contact Now!

There are total nine planets in Astrology i.e. Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn, Rahu and Ketu.

It is well know that Planets play a very important role in Vedic Astrology. Several things related to one’s density are directly connected with these planets. Now we go about these planets.

Sun or Surya is a royal planet and the king in astrology. He represents the soul, will power, father, paternal relations, the king or the high officials. Its hot and angry, colour is red, metal is gold and gem is ruby. Sun represents the eastern direction. The sun stays in each rasi for one month and takes one year to complete the round of the zodiac. Its motion is quite fixed and a lot of Indian festivals are as per the suns entry into the various signs. For example on January 14 it enters Makara and this day is celebrated as Makara Sankranti, On April 13th/14th it enters Mesha and this day is celebrated as Baisakhi. The change in seasons is also linked to the suns entry into various signs and nakshatras. He is the Pitra karaka or planet connected with father.

Moon or Chandra is also a royal planet and is the queen in astrology. He represents the mind, emotions, sensitivity, the mother, house and domestic comforts, milk, sea and all things connected with the sea, hotel and food industry, textiles and apparels: Its cold and calm, Its color is white, direction north-east, metal is silver and gem is pearl. The moon is the fastest moving of the 9 planets and takes approximately 2-1/2 days to travel a sign. When the sun and moon are in the same rasi it is called Amavashya or new moon day or the 1st day of the dark fortnight. The lunar days or Tithi changes with every 12 degree difference between the sun and the moon. When the sun and the moons are in the exact opposite signs or 180 degrees apart, it is called Poornima or the full moon day or the 1st day of the bright fortnight. He is the Matra karaka or planet connected with mother.
The sign in which your Moon is placed in the birth chart is called your Janma Rasi. The star constellation in which your Moon is placed is called your Janma Nakshatra.

Mars or Mangala or Kuja is commander in astrology. He represents, energy, courage, younger brothers & sisters, armed forces, the police forces, commanders, administrators, men in high position, land, engineering, metals, real estate agents and surgery. Its metal is copper and gem is coral, color is red and direction south. Mars takes about 45 days to travel one sign. He is the Bhatra karaka or planet connected with brother.

Mercury or Budha is the prince in astrology. He represents speech, intelligence, maternal uncles, short journeys, medical profession, trade, computers and the web, astrology and knowledge of the shastras, accounts, mathematics, journalism, printing and publishing. Its metal is bronze, gem is emerald, color is green and direction north. Mercury takes about a month to travel a rasi. It is always within 27 degree distance from the sun from astrological point of view.

Jupiter or Guru or Brihaspati is known as the "Devaguru" or the guru of the Gods. He represents higher knowledge, spirituality, priests, temples, teachers, research & scientists, layers & judges, children and knowledge of the sastras and astrology. Its color is yellow, metal gold, gem yellow sapphire and direction north - east. Jupiter takes about one year to travel a sign. He is the Putra karaka or planet connected with childrens.
Venus or Shukra is the "Daitya guru" or the guru of the demons. He represents spouse, sex life, kidneys and sex organ, dance, music, arts, gems and jewelers, wines, bars, gambling places, acting, fashion, cosmetics and beauty products. Its metal is silver, gem is diamond, direction is south-east and colour is white.Venus takes about a month to travel a sign and completes the round of the zodiac in 12 months. From astrological point of view it is always within 48 degrees of the sun. He is the Kalatra karaka or planet connected with spouse.

Saturn or_Shani is the servant in astrology. He represents hard work, sorrow, old men, servants and the lower level workers, people in the iron and steel industry, municipality and drainage works. A well placed Saturn can bestow excellent power, prestige, name and fame and a badly placed Saturn can devastate you. Its metal is iron, color is blue, gem is blue sapphire and direction is west. Saturn is the slowest moving of the 9 planets and takes approximately 2-1/2 years to transit a sign and completes the round of the zodiac in 30 years. He is the Udyog karaka or planet connected with profession.

Rahu or Dragon’s Head represents foreigners, foreign countries, foreign travel, engineering and the technical trades, smoke, old men, grandparents, theft, gambling, drinking, nonconformists, the underworld and the bad elements in the society. Its color is black, metal mixed-metal and gem is Gomedh. Rahu takes approximately 1-1/2 years to travel a sign and hence completes the round of the zodiac in 18 years.

Ketu or Dragon’s Tail represents grandparents, technical trades, spiritual inclinations, superstitions and electronics, its colour is brown and gem is cat's eye. Ketu is always in the opposite sign to Rahu, i.e., exactly 180 degrees away. Ketu also takes approximately 1-1/2 years to travel a sign and hence completes the round of the zodiac in 18 years.

Each of these 9 planets produce different results, and at times totally opposite results, while placed in the 12 different signs (rashis). Again each has some good results and some bad results in each sign. This is an important aspect of astrology which must be remembered. You will learn about these results later. While placed at various specific distances from the sun, the planets Mars, Mercury, Jupiter, Venus and Saturn become retrograde or appear to move in the backward direction. Sun and moon do not have any retrograde motion. The motion of Rahu and Ketu is always opposite to that of the other planets.

Want to know when and how your future will change according to your horoscope? Consult to renowned astrologer Pt. Umesh Chandra Pant and get predictions and effective solutions that reveal it all, only on Pavitra Jyotish Kendra

Pt Umesh Chandra Pant
Celebrity Astrologer,
www.pavitrajyotish.com 


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Sunday, 5 May 2013

पंडित उमेश चन्द्र पन्त एक संक्षिप्त परिचय

 
पंडित उमेश चंद्र पंत: एक संक्षिप्त परिचय

विश्वविख्यात ज्योतिषी पं. उमेश चंद्र पंत का जन्म 6 मई 1970 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (थल) स्थित लेजम पंत गांव में हुआ। बचपन से ही उन्हें ज्योतिष में अत्यधिक रुचि थी। वर्ष 1985 में हिंदी जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका “कादम्बिनी” के माध्यम से उनकी ज्योतिष के प्रति रुचि और बढ़ी। उस समय कादम्बिनी में तंत्र, मंत्र और ज्योतिष पर विशेषांक नियमित रूप से प्रकाशित होते थे। पंडित जी अपने जानने वालों की जन्मपत्रिका लेकर बैठते और उपाय सुझाते, जिससे लोगों को चमत्कारिक लाभ होने लगा। लगातार ज्योतिष में गहन कार्य करने के उपरांत उन्होंने वर्ष 2000 में "पवित्र ज्योतिष" की स्थापना की। इसके साथ ही, उन्होंने अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ (पंजीकृत) से ज्योतिष की संपूर्ण पढ़ाई भी पूरी की। उनके वर्षों के अध्ययन और स्वाध्याय के साथ-साथ अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ में प्राप्त शिक्षा ने उनके ज्योतिषीय ज्ञान को और भी निखारा। वर्तमान में पंडित जी कई विश्वस्तरीय पोर्टल और पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं और पूर्ण विनम्रता के साथ ज्योतिष के माध्यम से सेवा प्रदान कर रहे हैं।
 
  • शिक्षा: स्नातक और मेवाड़ विश्वविद्यालय से संबद्ध AIFAS से ज्योतिषीय विशेषज्ञता के लिए मान्यता प्राप्त।
  • व्यवसाय: संस्थापक ज्योतिषी - पवित्रज्योतिष, लेखक, उद्यमी, परोपकारी – नई दिल्ली, भारत
  • सक्रिय वर्ष: 1988 से वर्तमान
  • संगठन: पवित्रज्योतिष
  • जाने जाते हैं: भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी – सटीक कुंडली भविष्यवाणी और प्रभावी उपायों के लिए, वास्तु विशेषज्ञ, पूजा और अनुष्ठान विशेषज्ञ
  • पुरस्कार: लगातार नौ वर्षों (2017 से अब तक) से New Delhi India के ThreeBestRated® शीर्ष ज्योतिषी का खिताब, उत्कृष्ट प्रेरणा पुरस्कार 2024
  • सम्मान: ज्योतिष रत्न, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष प्रभाकर, ज्योतिष शास्त्राचार्य और ज्योतिष ऋषि
क्षमता:

जन्मपत्री देखकर भविष्यवाणी करना; जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्र जैसे करियर, व्यवसाय, धन, प्रेम, शिक्षा, संपत्ति, व्यक्तिगत समस्याएं, शत्रु, विवाह, कुंडली मिलान, भागीदारी, सेहत, मुहूर्त, वास्तु टिप्स और वास्तु दोष से जुड़ी समस्याओं का समाधान।

उपलब्धियां:

ज्योतिष, अध्यात्म और संबद्ध विज्ञान में एक विश्वप्रसिद्ध ज्योतिषी। इन क्षेत्रों में निपुणता और ज्ञान से पिछले 36 वर्षों (वर्ष 1988 से) में हजारों लोगों की मदद की है। लोगों की सेवा और उनके जीवन को बेहतर बनाने में योगदान के लिए कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्हें ज्योतिष रत्न, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष प्रभाकर, ज्योतिष शास्त्राचार्य और ज्योतिष ऋषि जैसी कई उपाधियों से सम्मानित किया गया है। कैरियर, व्यवसाय, धन, प्रेम, शिक्षा, संपत्ति, विवाह, पति-पत्नी संबंध, साझेदारी, भाग्य, व्यक्तिगत मामलों, स्थानांतरण, स्वास्थ्य, वास्तु, मुहूर्त आदि जीवन के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हजारों कुंडलियों का अध्ययन किया है। उन्होंने मार्गदर्शन और उपाय प्रदान किए हैं, जिससे संपर्क में आने वाले लोग एक स्वस्थ, समृद्ध और सुखी जीवन जी रहे हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। सबसे अच्छे मार्गदर्शन और अचूक उपाय के लिए निश्चित आश्वासन देते हैं। स्थानीय पत्रिकाओं और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों के लिए पिछले कई वर्षों से भविष्यवाणियां कर रहे हैं और कई अंतरराष्ट्रीय अग्रणी ज्योतिष वेबसाइटों और अन्य पोर्टलों पर ज्योतिष से संबंधित लेख भी लिखे हैं।

पारिवारिक परिदृश्य:

कुलीन ब्राह्मण परिवार से संबंधित हैं और पिछले 36 वर्षों से लोगों को ज्योतिषीय सलाह प्रदान कर रहे हैं। इस अवधि में उन्होंने हजारों कुण्डलियों का अध्ययन किया है। 36 वर्षों से ज्योतिष के अध्ययन-अध्यापन और मार्गदर्शन कार्य से जुड़े हुए हैं। आध्यात्मिकता, ज्योतिषीय ज्ञान और शक्ति गुरु एवं ईष्ट कुलदेवी माता जगदम्बा की कृपा से प्राप्त हुई है। उन्होंने भविष्यकथन के ज्योतिषीय मूलभूत सिद्धांतों पर प्रारंभिक शोध किया है। इस 36 वर्षों की अवधि में उन्होंने विभिन्न ज्योतिषीय पुस्तकों का अध्ययन किया और कई हजारों चार्ट का भी गहन अध्ययन किया है। उनके संपर्क में आने वाले भारतीय, एनआरआई और विदेशी सभी संतुष्ट हैं। वे हमेशा नए पाठ्यक्रम, सेमिनार और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल होते हैं।

अनुभव:

36 वर्ष (ज्योतिष सलाह देने का)

निपुणता:

ज्योतिष के क्षेत्र में विशाल ज्ञान होने के बावजूद, वे हमेशा अपने ज्ञान और कौशल को बढ़ाने में विश्वास रखते हैं। इसके लिए वे नियमित रूप से नए पाठ्यक्रम, सेमिनार और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। टेलीफोन, ईमेल या चैटिंग के माध्यम से भी ज्योतिषीय परामर्श प्रदान करते हैं। उनकी विशेषज्ञता कुंडली पढ़ने में है और वे करियर, व्यवसाय, पैसा, प्रेम, शिक्षा, संपत्ति, व्यक्तिगत मामलों, स्थानांतरण, शत्रु, शादी, भागीदारी, स्वास्थ्य, जीवन अध्ययन, मुहूर्त, वास्तु आदि जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उपचारात्मक उपाय प्रदान करते हैं। उनके संपर्क में आने वाले लोग एक स्वस्थ, धनी और सुखी जीवन का आनंद ले रहे हैं। उनके सुझाए गए उपायों ने कई लोगों के जीवन को बदल दिया है। वे वैदिक ज्योतिष के आधार पर सटीक भविष्यवाणी करने में निपुण हैं। समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए वे जन्म कुंडली का विश्लेषण करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि भविष्यवाणी को सही और सरल भाषा में समझाया जाए। वे अपनी कुलदेवी ईष्ट जगदंबा माता के परम भक्त हैं और समस्याओं के समाधान के लिए वैदिक पूजा और उपचार विधियों पर विश्वास करते हैं।

रुचियां:

कुंडली का पूर्वानुमान, ज्योतिषीय किताबें पढ़ना, ज्योतिष लेख लिखना, मासिक पूर्वानुमान, साप्ताहिक पूर्वानुमान लिखना, लोगों को सलाह देना, ज्योतिष परामर्श के माध्यम से लोगों की मदद करना, सटीक ज्योतिषीय उपाय करना, अपने ईष्ट की दैनिक पूजा करना, धार्मिक गीत सुनना, धार्मिक पुस्तकें पढ़ना और अधिक से अधिक लोगों की मदद करना।

ज्योतिष को करियर बनाने का कारण:

कुलीन ब्राह्मण परिवार से संबंधित हैं और बचपन से ही ज्योतिष में गहरी रुचि रखते हैं। भगवान (कुलदेवी जगदम्बा माता) में गहरा विश्वास रखते हैं। जो लोग ज्योतिष में विश्वास करते हैं, उनके लिए ज्योतिषीय उपचार जीवन बदल सकता है और वे स्वस्थ, धनी और सुखी जीवन जी सकते हैं। अपने सबसे अच्छे मार्गदर्शन और सही उपाय का आश्वासन देते हैं।

Contact information Pt. Umesh Chandra Pant
Website: PavitraJyotish



Monday, 29 April 2013

मंगल ग्रह एवम् विवाह



मंगल ग्रह एवम् विवाह   Contact Now!

ग्रहों में मंगल पृथ्वी का निकटतम पड़ोसी ग्रह है। सौरमंडल में यह सातवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 6794 किलोमीटर है जो कि पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है। यह ग्रह सदैव मनुष्य के लिए कौतुहल का विषय रहा है। सौरमंडल में सभी ग्रहों से मंगल की कक्षा दीर्घ वृताकार है। पृथ्वी से मंगल की दूरी 6,25,00,000 मील है। पृथ्वी के वातावरण से मंगल के वातावरण में समानता मानी जाती है।

ज्योतिष में मंगल को कालपुरुष का पराक्रम माना गया है। ग्रह मंडल में इन्हें सेनापति का पद प्राप्त है। मंगल पराक्रम, स्फूर्ति साहस, आत्मविश्वास, धैर्य देश प्रेम, बल, रक्त, दृढ़ता, महत्वाकाक्षां, खतरे उठाने की शक्ति, क्रोध, घृणा, उत्तेजना, झूठ एवम शस्त्र विद्या के अधिपति माने गये हैं।

मंगल मेष व वृशिचक राशि के स्वामी होते है। यह मकर राशि में उच्च के एवम कर्क राशि में नीच के होते है। मंगल को मृगशिरा, चित्रा एवम धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त है।

मंगल ग्रह शुभत्व का प्रतीक भी है। इस ग्रह की मूलभूत प्रवर्ती प्रजनन और कायाकल्प है। फिर भी इस ग्रह को अशुभ, क्रुर, घातक इत्यादि कहा व समझा जाता है। अग्नि  तत्व होने से मंगल सभी प्राणियो को जीवन शक्ति  देता  है एवम प्रेरणा उत्साह तथा साहस का प्रेरक होता है।

मंगल का बहुत ही संक्षिप्त एवं सटीक परिचय प्रस्तुत करने उपरांत आइये हम अपने मुख्य प्रसंग / विषय मंगल ग्रह एवम विवाह पर चर्चा करें।

लग्ने व्यये च पाताले, जामित्रे चाष्ट कुजे।
कन्या जन्म विनाशाय, भर्तुः कन्या विनाशकृत।।

अर्थात जन्म कुंडली में लग्न स्थान से 1, 4, 7, 8, 12वें स्थान में मंगल हो तो ऐसी कुंडली मंगलिक कहलाती है। श्लोकानुसार जिस ब्यक्ति की कुंडली में मंगल उपर्युक्त  भावों में हो तो उसे विवाह के लिए मांगलिक वर-वधू ही खोजना चाहिए। इसके अलावा यदि पुरुष या स्त्री की कुंडली में 1, 4, 7, 8, 12वें भाव में शनि, राहु, सूर्य, मंगल हो तो कुंडली का मिलान हो जाता है। यदि एक की कुंडली में मंगल उपरोक्त  भावों में स्तिथ हो तथा दूसरे की कुंडली में नहीं हो तो इस प्रकार के जातको के विवाह संबंध नहीं होने चाहिए। यदि अनजाने में भी कोर्इ विवाह संपन्न हो जाते हैं तो या तो ऐसे संबंध कष्टकारी होते हैं या फिर दोनो में मृत्यु योग की भी संभावना हो सकती है। अत: दोष का निवारण भली भाँति कर लेना चाहिए।

आइये अब यह जानने की कोशिश करें कि आखिर मंगल की इन भावों में स्तिथि क्या-क्या विपरीत प्रभाव डालती है या क्या प्रभाव होता है।

प्रथम भाव : कार्य सिद्धि में विघ्न, सिर में पीडा, चंचल प्रवृति, व्यक्तित्व पर प्रभाव, स्वभाव, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, समृद्धि, बुद्धि------
द्वितीय भाव : पैतृक सम्पति सुख का अभाव, परिवार, वाणी, निर्दयी प्रवृति, जीवन साथियो के बीच हिंसा, अप्राकृतिक  मैथून-------
चतुर्थ भाव :  परिवार व भाइयो से सुख का अभाव, घरेलू वातावरण, संबंधी, गुप्त प्रेम संबंधी, विवाहित जीवन में ससुराल पक्ष और परिवार का हस्तक्षेप, आनुवांशिक प्रकृति -----
सप्तम भाव : वैवाहिक जीवन प्रभावित, पतिपत्नी का व्यक्तित्व, जीवन साथी के साथ रिश्ता, काम शक्ति, जीवन के लिए खतरा, यौन रोग-----
अष्टम भाव : मित्रों का शत्रुवत आचरण, आयु, जननांग, विवाहेतर जीवन, अनुकूल उद्यम करने पर भी मनोरथ कम, मति-----
द्वादश भाव : विवाह, विवाहेतर काम क्रीड़ा, क्राम क्रीड़ा या योन संबंधो से उत्पन्न रोग, काम क्रीड़ा कमजोरी, शयन सुविधा, शादी में नुकसान, नजदीकी लोगो से अलगाव, परस्पर वैमनस्य, गुप्त शत्रु-----

यहाँ पर मैं स्पष्ट करना चाहूँगा कि द्वितीय भाव मैने पूर्व में कहीं भी इंगित नहीं किया था। किंतु विगत 22 वर्षो का मेरा अनुभव कहता है कि द्वितीय भाव में स्तिथ मंगल या अन्य पाप ग्रहों का उतना ही प्रभाव है जितना कि 1, 4, 7, 8 एवम 12 भावों में, द्वितीय भाव में पाप ग्रहों को कमतर आँकना कतर्इ भी संभव या उचित नहीं, क्योंकि मैने स्वयं अपने व्यक्तिगत जीवन में पाया कि द्वितीय भाव में स्तिथ मंगल या अन्य पाप ग्रह आजीवन अविवाहित या वैवाहिक जीवन को कष्टप्रद बना सकता हैं। इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं। अत: मेरा ज्योतिष प्रेमियों से विनम्र आग्रह है कि द्वितीय भाव का भी कुंडली मिलान में विशेष ध्यान रखना चाहिए।

अब हम जानने का प्रयास करेंगे कि किन स्तिथियों में मंगल दोष शांत या कम हो जाता है।

1: दूसरी कुंडली में भी 1, 4, 7, 8 एवम 12वें भाव में पाप ग्रह शनि, राहु, सूर्य, मंगल हो तो भौम मंगल दोष शांत हो जाता है।
2: मेष का मंगल लग्न में, वृशिचक के चतुर्थ में, वृषभ के सप्तम में, कुंभ के अष्टम एवम धनु के द्वादश में हो तो मंगल दोष कम हो जाता है।
3: यदि मंगल स्वराशि मेष, वृशिचक या मूल त्रिकोण उच्च या मित्र राशि में हो तो दोष में कमी आ जाती है।
4: कर्क एवम सिंह लग्न में लग्नस्थ मंगल का दोष कम हो जाता है।
5: 3, 6, 11 भावों में अशुभ ग्रह, केंद्र, त्रिकोण में शुभ ग्रह हो तथा सप्तमेश सप्तम भाव में हो तो दोष कम हो जाता है।
6: कन्या की कुंडली में गुरु केंद्र त्रिकोण में हो तो दोष कम हो जाता है।
7: पुरुष की कुंडली में शुक्र केंद्र त्रिकोण में हो तो दोष कम हो जाता है।
8: चन्द्र, गुरु या बुध से मंगल युति कर रहा हो तो दोष कम हो जाता है।
9: दूसरे भाव में मिथुन, कन्या का मंगल हो तो मंगल दोष कम हो जाता है।
10: चतुर्थ भाव में शुक्र की राशि (वृषभ, तुला) का मंगल दोष कम हो जाता है।
11: अष्टम भाव में गुरु राशि (धनु, मीन) का मंगल हो तो दोष कम हो जाता है।
12: सातवें भाव में मंगल पर यदि शुक्र की दृष्टि हो तो दोष कम हो जाता है।
13: यदि मंगल नीच, अस्त या वक्री हो तथा कुंडली के 1, 4, 8 एवम 12 भाव में हो तो मंगल दोष कम हो जाता है।

इस प्रकार कर्इ परिस्तिथियों  में मंगल का दोष काफी कम आँका गया है। जन्म कुंडली मिलान करते समय हमें इन सभी बातों का भी ध्यान रखना होता है।

पति-पत्नी का दाम्पत्य जीवन सुखद एवम सफल रहे इसी उद्देश्य को लेकर विवाह पूर्व जन्म कुंडली का मिलान कर गुण, स्वभाव एवम प्रकृति आदि के बारे में जाना जाता है। सर्वप्रथम हम मेलापक द्वारा गुण व गुणों की जाँच करते है जिसे अष्टकूट मिलान कहा जाता है। अष्ट कूट में दिये जाने वाले अंको को गुण कहते है। अधिकतम गुण 36 होते है। इसमें कम से कम 18गुण मिलने पर विवाह किया जा सकता है। मेरे व्यक्तिगत अनुभव में आया है कि ग्रह मैत्री एवं नाड़ी का महत्वपूर्ण स्थान है। गुण मिलान उपरांत हमें मंगल दोष विचार करना चाहिए, जिसकी कि हमने पहले की क्रमश: व्याख्या की हैं।

तदुपरांत दोनों कुंडलियों में धन विचार, परिवार का विचार, संतान का विचार, आयु का विचार, किसी भी प्रकार के नेष्ट का विचार यदि दिख रहा हो तथा भाग्य का विचार भी भली भाँति कर लेना चाहिए।

आजकल मुझे खास अनुभव में आ रहा है कि लोग साफ्टवेयर द्वारा स्वयं कुंडली मिलान कर, साफ्टवेयर द्वारा दिये गये निर्णय को ही अन्तिम निर्णय मानकर चल रहे है, किंतु मै यहां अपने ज्योतिष प्रेमियो को स्पष्ट करना चाहूँगा कि साफ्टवेयर से कुंडली मिलान उपरांत भी व्यक्तिगत रुप से ज्योतिषी से मिलकर या फ़ोन अथवा मेल से ज्योतिषी से जरूर विस्तृत मिलान करा लेवे एवं तदुपरांत ही अंतिम निर्णय (विवाह करने का) लेवे। इससे प्रत्येक व्यक्ति को सुखद वैवाहिक जीवन की अनुभूति होगी।

हम पुन: अपने विषय पर आकर यही कहेंगे कि मंगल अमंगल नहीं हो सकता यदि आप वास्तव में सचेत है तब।

यदि हम मंगल की बात करें तो मंगल निम्नांकित को प्रतिनिधित्व करता है।

शक्ति, साहस,  पराक्रम,  प्रतियोगिता,  क्रोध,  उत्तेजना,  षडयंत्र,  शत्रु,  विपक्ष,  दुराग्रही,  युवा,  छोटे भार्इ,  फौजी प्रकृति,  हवार्इ यात्रा,  मजदूर नेता,  विवाद, शस्त्र,  सेनाध्यक्ष,  युद्ध,  दुर्घटना,  अग्नि,  घाव,  भूमि,  अचल सम्पत्ति, हथियार, अग्निस्थल, रक्त,-----
स्पष्ट है निश्चित ही मंगल ग्रह हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इन्ही सब बातो को ध्यान में रखकर मंगल ग्रह को वैवाहिक जीवन में अत्यंत महत्ता दी है। कहा भी गया है ''सन्मगलं मंगल:

मंगल दोष निवृति उपाय :

1: मंगल मंत्र का जप, मंत्र: ''ऊँ अं अगारकाय नम: जप संख्या - 11,100
2: मंगल यंत्र की पूजा
3: मंगलवार के व्रत

यदि हम कुंडली मिलान में सावधानी रखे तो निश्चित ही मंगल हमारे लिए मंगलकारी होंगे।

यथा

मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुढ़ध्वज।
मंगलम पुण्डरिकाक्ष:, मंगलाय तनो हरि:।।

उमेश चन्द्र पन्त ज्योतिषाचार्य,
Celebrity Astrologer:  ganesganeshaspeaks, astroyogi
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